Kapil Sibal Pledges ₹1 Crore as CJP Ramps Up Legal Fight for Students Facing Police Action
A nationwide legal campaign to defend students facing police action after the NEET protests gathered momentum on Monday, with senior advocate and Rajya Sabha MP Kapil Sibal announcing a contribution of ₹1 crore towards legal aid and backing the Cockroach Janta Party’s plan to build a countrywide support network for protesters battling criminal cases.
The initiative comes amid growing allegations that students are continuing to face arrests, FIRs and police surveillance despite assurances that no coercive action would follow the negotiations between the government and protest leaders.
Explaining the plan, Sibal said the CJP would shortly launch an online platform designed to document every instance of police action linked to the protests.
The portal will track where cases have been registered, identify affected students and volunteers, and monitor the legal status of each case so that those facing prosecution are not left to fight alone.
The proposed website will also create a nationwide panel of lawyers willing to represent students.
Advocates interested in offering legal assistance will be able to register their names, location and areas of practice, enabling protesters to quickly connect with legal help wherever cases are lodged.
Declaring that he would personally donate ₹1 crore to establish the legal support mechanism, Sibal appealed to members of the Bar across the country to contribute generously.
He said the fund would ensure that peaceful protesters allegedly implicated in false criminal cases receive effective legal representation, irrespective of the state in which proceedings are initiated.
Political pressure over the alleged crackdown also intensified during the day.
Samajwadi Party president Akhilesh Yadav accused the Uttar Pradesh Police of picking up students under the pretext of the Prayagraj protests, questioning why such action was being taken after the Centre had publicly assured that no student would be targeted.
Sharing visuals aired by a local television channel, the former Uttar Pradesh Chief Minister demanded to know who had authorised the alleged detentions.
छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए आगे आए कपिल सिब्बल, CJP के राष्ट्रीय लीगल नेटवर्क को ₹1 करोड़ की सहायता
नीट आंदोलन के बाद देशभर में छात्रों के खिलाफ दर्ज हो रहे मुकदमों और कथित पुलिस कार्रवाई के बीच उनकी कानूनी लड़ाई को संगठित रूप से लड़ने की तैयारी शुरू हो गई है।
इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोमवार को एक करोड़ रुपये की कानूनी सहायता देने की घोषणा की।
साथ ही उन्होंने देशभर के वकीलों से आगे आकर इस अभियान का हिस्सा बनने और आर्थिक सहयोग देने की अपील की।
यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब विभिन्न राज्यों से छात्रों की गिरफ्तारी, एफआईआर दर्ज होने और पुलिस निगरानी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करने के सरकारी आश्वासन के बावजूद कई स्थानों पर दमनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास के साथ मौजूद सिब्बल ने बताया कि संगठन जल्द ही एक समर्पित वेबसाइट शुरू करेगा।
यह पोर्टल आंदोलन से जुड़े प्रत्येक मामले का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करेगा। किस राज्य में किस छात्र के खिलाफ कार्रवाई हुई, किसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई, कौन हिरासत में लिया गया और किस मुकदमे की सुनवाई किस स्तर पर चल रही है—
इन सभी जानकारियों को एक ही मंच पर संकलित किया जाएगा।
सिर्फ रिकॉर्ड तैयार करना ही इस वेबसाइट का उद्देश्य नहीं होगा। यह मंच छात्रों और अधिवक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
जो वकील आंदोलनकारियों की ओर से अदालतों में पैरवी करना चाहते हैं, वे वेबसाइट पर अपना नाम, शहर और विशेषज्ञता दर्ज करा सकेंगे ताकि किसी भी राज्य में कानूनी सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जा सके।
अपने एक करोड़ रुपये के योगदान की घोषणा करते हुए सिब्बल ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कानून का दुरुपयोग कर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, तो उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेदारी समाज और कानूनी बिरादरी दोनों की है।
उन्होंने देशभर के अधिवक्ताओं और नागरिकों से इस कोष को मजबूत बनाने का आह्वान किया ताकि किसी भी छात्र को केवल संसाधनों के अभाव में न्याय से वंचित न होना पड़े।
उधर, आंदोलन के बाद छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रयागराज प्रदर्शन की आड़ में उत्तर प्रदेश पुलिस कई छात्रों को उठा रही है।
स्थानीय समाचार चैनल के दृश्य साझा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने सार्वजनिक रूप से भरोसा दिया था कि किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तो आखिर यह कार्रवाई किसके निर्देश पर की जा रही है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में अखिलेश यादव ने कहा कि यदि छात्रों को इसी तरह निशाना बनाया जाता रहा, तो इससे प्रधानमंत्री के सार्वजनिक आश्वासनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे।
उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी छात्रों की तत्काल रिहाई, कार्रवाई के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन और उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग की।
सपा प्रमुख ने सर्वोच्च न्यायालय से भी स्वतः संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा और भविष्य दोनों गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं तथा न्यायपालिका को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
इस बीच कांग्रेस ने भी छात्रों के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया। पार्टी ने कहा कि जिन छात्रों को कानूनी नोटिस मिले हैं, जिन्हें हिरासत में लिया गया है, पूछताछ के लिए बुलाया गया है या जिनकी सोशल मीडिया पोस्ट हटाई गई हैं, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके लिए कांग्रेस ने अपना ‘सीकेजी लीगल एसओएस’ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया।
कांग्रेस का आरोप है कि छात्र प्रतिनिधियों से हुई बातचीत के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट आश्वासन दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं होगी।
इसके बावजूद बिहार, पश्चिम बंगाल और पटना में छात्रों पर एफआईआर दर्ज होने का दावा करते हुए पार्टी ने कहा कि इंडियन यूथ कांग्रेस, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आंदोलनकारी छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी हैं।
पार्टी ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।
इधर कॉकरोच जनता पार्टी ने भी केंद्र सरकार को कड़ा संदेश देते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर हुई सहमति का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर जारी बयान में दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली और अन्य राज्यों में कई छात्रों तथा स्वयंसेवकों पर निगरानी रखी जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के लिए रसद सहायता जुटाने वाले स्वयंसेवकों को भी दिल्ली में हिरासत में लिया जा रहा है।
संगठन ने मांग की है कि आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं, हिरासत में लिए गए छात्रों को बिना शर्त रिहा किया जाए और दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों तथा भाजपा शासित एवं सहयोगी राज्यों की पुलिस भविष्य में कोई नया मुकदमा दर्ज न करे।
सीजेपी ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर अमल नहीं हुआ तो वह दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी।
साथ ही संगठन ने मंगलवार तक केंद्र सरकार से एक लिखित आश्वासन भी मांगा है, ताकि छात्रों के खिलाफ लंबित और भविष्य की कानूनी कार्रवाइयों को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता न रहे।
उसके अनुसार, केवल मौखिक भरोसे से अब काम नहीं चलेगा; छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस और लिखित प्रतिबद्धता आवश्यक है।

